लाखों लोगों के दिमाग पर असर करने वाली इस बीमारी को लेकर आए दो बड़े अपडेट्स, आप भी जानिए

 वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं पर न्यूरोलॉजिकल असंतुलन के कारण साल-दर-साल अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है। अल्जाइमर रोग ऐसी ही एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जिससे विश्व में करोड़ों लोग प्रभावित हैं, इसे डायमेंशिया रोग सबसे आम माना जाता है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि वर्तमान में विश्व में 5.5 करोड़ से ज्यादा लोग अल्जाइमर से पीड़ित हैं और इसके कारण होने वाली डायमेंशिया से पीड़ित हैं, और अनुमान है कि 2050 तक यह संख्या 13.9 करोड़ हो सकती है। अल्जाइमर को एक प्रगतिशील न्यूरोडिजेनेरिवेटिव (तंत्रिका-क्षयकारी) विकार के रूप में जाना जाता है जो स्मृति, सोच और दैनिक कार्य करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।


अल्जाइमर रोग से कैसे बचाव किया जाए इस बारे में अब तक विशेषज्ञ की टीम को ज्यादा जानकारी नहीं है। हालांकि इस बीमारी के बारे में हाल ही में दो बड़े अपडेट आए हैं, जिनके बारे में सभी लोगों को जानना जरूरी है।


पहला- एक अध्ययन में अल्ट्रासाउंड टीम ने बताया कि अल्जाइमर रोग से कैसे छुटकारा पाया जा सकता है, इस बारे में जानकारी साझा की गई है

वहीं दूसरी खबर चीन से है जहां विशेषज्ञ ने इस बीमारी के इलाज के तरीकों में बड़े बदलाव किए हैं। आइये इसके बारे में जानते हैं

पहले अध्ययन की बात जिसमें अल्जाइमर रोग के खतरे को कम करना और इससे बचाव को लेकर तर्क शामिल है, उसमें बड़ी जानकारी साझा की गई है।


अल्जाइमर रोग से बचाव में आंतरायिक उपवास का लाभ


एक अध्ययन के दौरान विशेषज्ञ की टीम ने पाया कि यदि आप नियमित रूप से नौकरी करते हैं तो इससे मस्तिष्क में कुछ ऐसे परिवर्तन हो सकते हैं जिनकी मदद से अल्जाइमर जैसी गंभीर समस्याओं के खतरे को कम किया जा सकता है।


जर्नल जर्नलिएंट्स ने एक समीक्षा में प्रकाशित किया कि वर्का की टीम ने बताया कि आपके लिए अल्जाइमर से बचाव में इंटरमीटेंट फास्टिंग करना कमाल हो सकता है। इस फास्टिंग की मदद से मस्तिष्क में टॉक्सिन प्रोटीन ब्रेडन कम होता है जिससे विभिन्न प्रकार के न्यूरोडीजेनेरिवेटिव एलिवेटर का खतरा कम होता है।

वहीं दूसरी तरफ चीन ने इस बीमारी के इलाज में एक बड़ा बदलाव किया है।



चीन ने अल्जाइमर रोग के इलाज में बदलाव किये


चीन ने अल्जाइमर रोग के इलाज को लेकर एक बड़ा फैसला किया है, इस बीमारी के इलाज पर प्रतिबंध लगाया गया है। चार सालों में करीब 400 लोगों ने इस इलाज को लेकर ये फैसला लिया। स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि इस पद्धति की सुरक्षा और चिकित्सकीय गुणों की कमी है, इसलिए यह निर्णय लिया गया है।


'लिम्फैटिक-वेनस एनास्टोमोसिस' (एलवी) के नाम से जानी जाने वाली इस प्रक्रिया में मरीज़ के जहाजों को गर्दन के पास की नसों से जोड़ा जाता है, ताकि लसिका द्रव का प्रवाह और प्रवाह तेज हो सके। इसका उद्देश्य विकिरण में तेजी से लाना और रोग की प्रगति को धीमा करना है।


'चाइना डेली' की राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल में पता चला है कि कुछ चिकित्सा संस्थान अल्जाइमर रोग से पीड़ितों की 'लिम्फैटिको वेनस एनास्टोमोसिस' (वीए सर्जरी) कर रहे हैं। आयोग ने एक नोटिस में कहा कि इस खोज के बाद, उसने प्रक्रिया की सुरक्षा और प्रभावकारिता का आकलन किया।

असस्वीकरण:  स्याहिदानी स्वास्थ्य एवं फिटनेस श्रेणी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञ और टूल से बातचीत के आधार पर तैयार किए गए हैं। इस लेख में स्याहिदानी के पेशेवर पेशेवरों द्वारा जांच पुस्तक का उल्लेख किया गया है। इस लेख को तैयार करने के लिए सभी प्रकार के निर्देश दिये गये हैं। संबंधित लेख आर्टिकल की जानकारी और जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है।    स्याहीदानी  के लेख में प्रदत्त जानकारी और सूचना लेकर किसी भी तरह का दावा नहीं किया गया है और न ही कोई जिम्मेदारी दी गई है। इस लेख में संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

आकलन से यह निष्कर्ष निकलता है कि अल्जाइमर रोग के इलाज के लिए एलवी सर्जरी के उपयोग में प्रीक्लिनिकल खुराक से प्राप्त मापदंडों की कमी है, जिसके लिए इसपर रोक लगाई जा रही है।


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